B- School में एडमिशन के लिए CAT ज्यादा बेहतर है या MAT

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Updated on: 6 days ago
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मैनेजमेंट कोर्स में एडमिशन के लिए कॉमन एडमिशन टेस्ट और मैनेजमेंट एप्टीट्यूड टेस्ट, दो कोर्स सबसे ज्यादा पॉपुलर हैं. ये दोनों एंट्रेंस एग्जाम एमबीए में एडमिशन के लिए कंडक्ट किए जाते हैं. कैट और मैट के स्कोर के आधार पर ही स्टूडेंट्स को देशभर के टॉप बी-स्कूलों में एडमिशन मिलता है. दोनों एग्जाम एमबीए में एडमिशन के लिए हैं लेकिन दोनों के पैटर्न में अंतर है। कई बार स्टूडेंट्स ये तय नहीं कर पाते कि वे कैट की तैयारी करें या फिर मैट के लिए.

मैट
मैनेजमेंट एप्टीट्यूड टेस्ट साल में 4 बार ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसाेसिएशन द्वारा कंडक्ट किया जाता है. ये एग्जाम फरवरी, मई, सितम्बर और दिसम्बर महीने में होते हैं. कैंडीडेट इस परीक्षा में अपनी सहूलियत और तैयारी के स्टैंडर्ड के हिसाब से अपीयर हो सकते हैं. वो किसी भी सेशन में एग्जाम दे सकते हैं या फिर साल में दो बार भी अलग-अलग सेशंस में अपीयर हो सकते हैं.

कैट
कॉमन एडमिशन टेस्ट साल में एक बार ही कंडक्ट किया जाता है. इस एग्जाम को देश भर के 6 आईआईएम हर साल रोटेशनल बेसिस पर कंडक्ट करते हैं.

एलिजिबिलिटी
दोनों ही एग्जाम्स के लिए न्यूनतम योग्यता किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री है. हालांकि कैट के लिए 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास होना जरूरी है. वहीं मैट के लिए न्यूनतम प्रतिशत जैसा कोई क्राइटेरिया नहीं है. आप ग्रेजुएशन के बाद इस एंट्रेस टेस्ट के लिए आवेदन दे सकते हैं.

एग्जाम पैटर्न
कैट कम्प्यूटर बेस्ड ऑनलाइन टेस्ट है. वहीं मैट एग्जाम ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में कंडक्ट किया जाता है. कैट का क्वेश्चन पेपर सिर्फ इंग्लिश में होता है. वहीं मैट का पेपर हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में होता है.

कैट एग्जाम में वर्बल एबिलिटी एंड रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन, डाटा इंटरप्रेटेशन एंड लॉजिकल रीजनिंग और क्वांटिटेटिव एबििलटी जैसे 3 सेक्शन होते हैं. कैट एग्जाम में 100 क्वेश्चंस होते हैं. हर सवाल 3 अंकों का होता है और गलत जवाब के लिए 1 अंक कट जाते हैं. वहीं मैट में सिर्फ एक एडिशनल सेक्शन होता है-इंडियन एंड ग्लोबल एनवायरमेंट. इसके पेपर में सवालों की संख्या 200 होती है. मैट में सही जवाब के लिए 1 अंक मिलते हैं और गलत जवाब के 1/4 अंक कट जाते हैं.

समय
मैट एग्जाम 2 घंटे और 30 मिनट का होता है. इस एग्जाम में अलग-अलग सेक्शन नहीं होते, इसलिए टाइम लिमिट जैसी बातें अप्लाई नहीं होती हैं. कैट एग्जाम 3 घंटे का होता है और इसमें सेक्शनल टाइम लिमिट भी लागू होती है. हर सेक्शन के लिए आपको एक-एक घंटे का समय डिवाइड करना होता है.

डिफिकल्टी लेवल
मैट एग्जाम का डिफिकल्टी लेवल आसान से मॉडरेट तक होता है. ऐसे स्टूडेंट्स जो कैट की तैयारी कर रहे हैं, वो मैट के क्वेश्चन्स को आसानी से सॉल्व कर लेते हैं. अगर आप कैट की तैयारी कर रहे हैं तो मैट की तैयारी भी इसके साथ ही हो जाएगी. वहीं कैट के पेपर की बात करें, तो इस एग्जाम का पेपर मुिश्कल होता है. डिफिकल्टी लेवल की बात करें तो जहां 1 से 5 तक के स्केल पर कैट का डिफिकल्टी लेवल 5/5 है वहीं मैट का 3/5। कैट मैनेजमेंट एंट्रेस एग्जाम्स में सबसे मुश्किल माना जाता है.

कॉम्पिटिशन लेवल
कैट एग्जाम आईआईएम और दूसरे टॉप के संस्थानों जैसे एफएमएस और आईआईटी में एडमिशन के लिए है. इस एग्जाम के लिए हर साल 2 लाख से भी ज्यादा स्टूडेंट्स अपीयर होते हैं. इनमें से कुछ ही स्टूडेंट्स का सलेक्शन 2500 सीटों के लिए हो पाता है. वहीं मैट एग्जाम की बात करें तो ये टियर 2 बी स्कूलों में एडमिशन के लिए कंडक्ट किया जाता है. इसलिए ज्यादातर स्टूडेंट्स प्राथमिकता कैट एग्जाम क्वालिफाई करने की होती है.

प्रीवियस इयर पेपर्स
कैट एग्जाम का पैटर्न बदलता रहता है इसलिए प्रीवियस इयर के पेपर सॉल्व करने का कुछ खास फायदा नहीं होता. वहीं मैट एग्जाम के लिए अगर आप प्रीवियस इयर क्वेश्चन पेपर्स से तैयारी करते हैं तो इसका फायदा मिलता है.

संभावनाएं
कैट एग्जाम के जरिए देश भर के 1000 से भी ज्यादा बिजनेस स्कूलों में एडमिशन ले सकते हैं. ये एग्जाम आईआईएम और टियर 1 बी स्कूलों में एडमिशन के लिए कंडक्ट किया जाता है. वहीं मैट के जरिए आपके पास सिर्फ 630 बी स्कूलों में एडमिशन का विकल्प होता है.

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